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इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण

नेट जीरो आयात के असाधारण लक्ष्य को हासिल करना

इस स्तंभ आशय का एक असाधारण प्रदर्शन के रूप में 2020 तक नेट शून्य आयात के लक्ष्य के साथ देश में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए कई क्षेत्रों में समन्वित कार्यवाही की आवश्यकता है, जैसेः

  1. कराधान, प्रोत्साहन
  2. अर्थव्यवस्था का पैमाना, लागत नुकसान को कम करना
  3. फोकस क्षेत्र - बिग टिकट आइटम
    • फैबस, फैब लेस डिजाइन, सेट टॉप बॉक्स, वीसैट, मोबाइल, उपभोक्ता और मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स, स्मार्ट ऊर्जा मीटर, स्मार्ट कार्ड और माइक्रो-एटीएम।
  4. इन्क्यूबेटर, क्लस्टर
  5. कौशल विकास,पीएचडी कर रहें छात्रों को प्रोत्साहित करना।
  6. सरकारी खरीद
  7. सुरक्षा के मानक - अनिवार्य पंजीकरण, प्रयोगशालाओं और लघु उद्योगों के लिए सहायता
  8. राष्ट्रीय पुरस्कार, विपणन, ब्रांड बिल्डिंग
  9. राष्ट्रीय केंद्र - फ्लेक्सिबल इलेक्ट्रॉनिक्स, सुरक्षा बल
  10. इलेक्ट्रॉनिक्स में आर एंड डी

वर्तमान में चल रहें कई कार्यक्रमों को ठीक से समायोजित किया जाएगा। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए मौजूदा ढांचा अपर्याप्त हैं और इसे मजबूत बनाने की जरूरत है।

इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं की मांग 22% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) के साथ बढ़ती जा रही है और 2020 तक 400 अरब डालर तक पहुँचने की उम्मीद है। भारत सरकार भी इस क्षेत्र में विनिर्माण और निवेश को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रही है जिससे भारत का निवेश करने के लिए संभावित स्थानों की सूची में उच्च स्थान है।

Demand

इलेक्ट्रॉनिक्स पर राष्ट्रीय नीति (एनपीई)

भारत सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स पर राष्ट्रीय नीति को 2012 (एनपीई 12) में मंजूरी दी है, जो भारत में बढ़ते इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन और विनिर्माण (ईएसडीएम) क्षेत्र में निवेश के लिए वैश्विक और घरेलू कंपनियों को आकर्षित करने के लिए एक अनुकूल माहौल बनाने की दिशा में प्रेरित, समग्र और निवेशकों के अनुकूल बाजार उपलब्ध कराती है। यह कंपनियों को ईएसडीएम के क्षेत्र में गंतव्य के रूप में भारत पर विचार करने का अद्वितीय और दुनिया के सबसे बड़े इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण हब का हिस्सा बनने का अवसर देता है, साथ ही मध्यम और उच्च प्रौद्योगिकी के निर्माण में वैल्यू एडेड निर्माण को शामिल करने का भी अवसर प्रदान करता हैं।

2012 फ्रेमवर्क (एनपीई) की मजबूत नींव कि स्थापना के लिए भारत सरकार द्वारा उल्लेखनीय प्रगति की गयी है। इससे मध्यम और उच्च प्रौद्योगिकी से जुड़े मूल्यवर्धित विनिर्माण को मदद मिलेगी। भारत सरकार द्वारा की गई नीतिगत पहल के मुख्य आकर्षण में निम्नलिखित शामिल हैः

  1. संशोधित विशेष प्रोत्साहन पैकेज योजना (एमएसआईपी) के पूंजीगत व्यय (एसईजेड में 20%) पर 25% की सब्सिडी उपलब्ध है और सभी आबकारी/सीवीडी के पूंजीगत उपकरणों पर भुगतान प्रतिपूर्ति देय है।
  2. इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण क्लस्टर योजना, बुनियादी ढांचे के विकास एंव ग्रीनफील्ड कलस्टर (इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण बिंदु से अविकसित या अविकसित क्षेत्र) में आम सुविधाओं के लिए 50% और ब्राउन कलस्टर (क्षेत्र जहां, मौजूदा ईएमसी की महत्वपूर्ण संख्या मौजूद है) की लागत का 75% प्रदान करती है। नए इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण कलस्टरों के लिए भूमि भारत सरकार द्वारा उपलब्ध कराया जा रहा है। वर्तमान में लगभग 30 इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण क्लस्टर अधिसूचित हैं और भारत सरकार ने 2020 तक 200 इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण क्लस्टरों के निर्माण का लक्ष्य लक्षित किया है।
  3. सरकारी खरीद में घरेलू स्तर पर निर्मित वस्तुओं को वरीयता। सरकारी खरीद में इसकी हिस्सेदारी 30% से कम नहीं होगी। लगभग 30 इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों को पहले ही इस योजना के तहत अधिसूचित किया गया हैं।
  4. घरेलू स्तर पर निर्मित सेट टॉप बॉक्स और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का निर्यात, विदेश व्यापार नीति के तहत फोकस प्रोडक्ट स्कीम में 2-5% प्रोत्साहन के योग्य हैं।
  5. इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक्स और आईपी जनरेशन में स्टार्ट-अप के समर्थन विचाराधीन है, इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास और नवाचार के लिए इलेक्ट्रॉनिक विकास फंड सक्रिय कर दिया गया है।
  6. विभाग द्वारा देश में दो अर्धचालक वफ़र फैब्रीकेशन (फैब) विनिर्माण सुविधाओं की स्थापना को मंजूरी दी गई है।
  7. इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी में अधिक से अधिक अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार द्वारा उद्योग की विशिष्ट आवश्यकताओं के क्षेत्र में अनुसंधान के लिए देश के विश्वविद्यालयों में पीएचडी छात्रों को सहायता निधि दी जाएगी। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी/आईटीईएस के क्षेत्र में इस कार्यक्रम के माध्यम से 3000 पीएचडी छात्र तैयार किये जाएगें।
  8. दो सेक्टर कौशल परिषद् - दूरसंचार और इलेक्ट्रॉनिक्स के माध्यम से निजी क्षेत्र के लिए कौशल विकास का अवसर प्रदान करना। इस योजना के तहत भारत सरकार कौशल विकास को समर्थन प्रदान करने के लिए कुशल और अर्ध-कुशल श्रमिकों के उद्योग विशेष कौशल प्रशिक्षण के लागत का 75% से 100% प्रदान करती है।
  9. अनिवार्य मानक व्यवस्था के तहत प्रयोगशाला परीक्षण के बुनियादी ढांचे में निवेश के अवसर को बल मिलेगा।
  10. आंध्र प्रदेश और कर्नाटक सहित कई राज्य सरकारों ने पहले ही अपनी राज्य इलेक्ट्रॉनिक नीतियों में पूरक प्रोत्साहनों की घोषणा कर दी है। इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण क्लस्टर की घोषणा मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, पंजाब और केरल राज्यों द्वारा की गई है। अन्य राज्य भी इसी तरह की पहल करने की प्रक्रिया कर रहे हैं, जिससे ईएसडीएम निवेशकों को प्रोत्साहन और सुविधा उपलब्ध हो सके।
  11. इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाइन और विनिर्माण (ईएसडीएम) के क्षेत्र में सूक्ष्म, लघु और मध्यम स्तर के उद्योगों (एमएसएमई) की पहचान करने औऱ प्रेरित करने के लिए, भारत सरकार (जीओआई) ने एक राष्ट्रीय योजना कि घोषणा की है। इस योजना का उद्देश्य भारतीय विनिर्माण में गुणवत्ता का निर्माण करने के साथ ही निर्यातकों को प्रोत्साहित करना और विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए लघु उद्योगों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। इस योजना के तहत एमएसएमई में निर्माताओं को प्रतिपूर्ति के रूप में समर्थन प्रदान किया जाएगा। अनुदान में सहायता के रूप में वित्तीय सहायता द्वारा इस योजना से इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में निर्माताओं, घरेलू उद्योग, निर्यातकों को फायदा होने की उम्मीद है। इसके साथ ही यह योजना मध्यम और उच्च प्रौद्योगिकी से जुड़े विनिर्माण को आकर्षित करने में मदद करेगी। योजना निम्नलिखित गतिविधियों के लिए जीआईए प्रदान करेगीः
    1. डीईआईटीवाई द्वारा अधिसूचित "भारतीय मानक" के साथ इलेक्ट्रॉनिक सामान के अनुपालन से संबंधित व्यय की प्रतिपूर्ति। एक मॉडल के लिए कुल जीआईए एक लाख तक सीमित है, केवल 200 मॉडलों (अधिकतम) के लिए।
    2. निर्यात के लिए परीक्षण और प्रमाणन के व्यय की प्रतिपूर्ति जरूरी है। योजना के तहत एक मॉडल के लिए कुल जीआईए `1.25 लाख है, 800 मॉडल (अधिकतम)।
    3. नैदानिक अध्ययन, साफ्ट हस्तक्षेप और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट आदि तैयार करने के लिए एमएसएमई द्वारा इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण कलस्टरों का विकास। योजना के तहत कलस्टर विकास के लिए उपलब्ध कुल जीआईए 10 लाख/क्लस्टर (अधिकतम) जो 20 क्लस्टरों की स्थापना के लिए उपलब्ध होगा।

यह सभी प्रोत्साहन इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन और विनिर्माण इकाई के लिए उपलब्ध हैं। यह सभी प्रोत्साहन विदेश से विनिर्माण संयंत्र के स्थानांतरण पर भी उपलब्ध है। इन क्षेत्रों में सेमीकंडक्टर फैब, दूरसंचार उत्पाद, एलईडी फैब एंव उत्पाद, ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर एटीएमपीएस, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और उपकरण, स्मार्टफ़ोन और टैबलेट्स सहित हैण्ड-हेल्ड उपकरण, सामरिक इलेक्ट्रॉनिक्स, ईएमसी, हवाई जहाज और मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स आदि शामिल हैं। उत्पाद आधारित आर एंड डी के व्यय को भी एमएसआईपीएस के तहत शामिल किया गया है।

इन नीतियों के विवरण के लिए विभाग की वेबसाइट : www.deity.gov.in/esdm पर जाया जा सकता है।

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